क्या प्राइवेसी के नाम पर फेसएप्प से आपको इसलिए डराया जा रहा है क्यूंकि यह एक रूसी एप्लिकेशन है?

क्या प्राइवेसी के नाम पर फेसएप्प से आपको इसलिए डराया जा रहा है क्यूंकि यह एक रूसी एप्लिकेशन है?

यूँ तो फेसएप्प को लांच हुए दो साल हो गए पर यह पर चर्चाओं में अभी कुछ दिनों से है. पहले सोशल मीडिया पर सबने अपने बुढ़ापे वाली फोटो डाल-डालके इसे वायरल कर दिया और फिर प्राइवेसी पर ढेर सारी बातें इसे न्यूज में बनाये हुए है. क्या है अफवाहें और क्या है सच्चाई?

पहले जानते हैं फेसएप्प के बारे में:

फेसएप्प एक मोबाइल एप्लिकेशन है जो यह दावा करती है कि वो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के आधार पर किसी व्यक्ति के फोटो को भविष्य और भूतकाल में लेके जाती है. Yaroslav Goncharov जो कि एक रूसी प्रोग्रामर है उन्होंने यह एप्लिकेशन बनाई है और यह यूजर्स के लिए यह एंड्राइड और IOS प्लेटफार्म पर उपलभ्द है.

क्या है इसके पीछे की टेक्नोलॉजी:

फेसएप्प जितने मौज में शेयर की जा रही है, इसके पीछे की टेक्नोलॉजी उतनी है जटिल और उन्नत है और इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस होने की वजह से अभी आगे अपार संभावनाएं हैं.  यह एप्लिकेशन “डीपफेक” नामक टेक्नोलॉजी पर काम करती है.

आइये इसे समझते हैं: 

यदि किसी स्केच आर्टिस्ट को कई इंसानों के अलग-अलग समय की कुछ फोटोग्राफ्स मुहैया करायी जाए और वह एक पैटर्न ढूंढने में सफल हो जाये तो उस आधार पर वो किसी इंसान के भूत-भविष्य की फोटो डिजाइन कर सकता है. पर यह बहुत जटिल है क्यूंकि इंसानी चेहरे का स्ट्रक्चर विभिन्न प्रकार का होता है. पहला काम है कि सभी तरह के चेहरे को एक जगह रख के उनमें एक जैसे स्ट्रक्चर का ग्रुप बनाना फिर उन ग्रुप्स के कॉमन पैटर्न ढूंढना. जैसे अंडाकार चेहरे के जवानी और बुढ़ापे में क्या फर्क पड़ता है क्यूँ पड़ता है आदि. एक बार यह पैटर्न मिल जाए तो किसी के चेहरे का भविष्य डिजाइन किया जा सकता है. जो कि यह एप्लिकेशन दावा करती है.

FaceApp Security Concern

इतनी मेहनत का फायदा क्या है?

वैसे तो अभी हम अपना बुढ़ापा देख-दिखा रहे हैं पर यह टेक्नोलॉजी जितनी उन्नत होगी इंसान को इसका बहुत फायदा मिलने वाला है. मसलन कोई अपराधी जिसका कुछ वर्षों से अता-पता नहीं हो उसका चेहरा हमेशा अपडेटेड रहेगा. किसी बच्चे के खोने के कई साल बाद भी उसे ढूंढा जा सकता है. यह आर्टिकल लिखते लिखते ऐसा एक मामला आ भी गया है (http://www.ladbible.com/news/news-faceapp-style-technology-helps-to-find-missing-child-after-18-years-20190720) इस सबके अलावा कंप्यूटर के जरिये इंसानी चेहरे को समझने और रिसर्च में भी मदद मिलेगी जिसके भविष्य में बहुत से फायदे मिलेंगे.

क्या है प्राइवेसी वाला मामला:

फोर्ब्स पर आये एक आर्टिकल में दावा किया गया कि इस एप्प्लिकेशन के पास लाखों लोगों के नाम और फोटो हैं. जिसे बाद में बेचा जा सकता है. बेचने अथवा थर्ड पार्टी के साथ शेयर करने वाली बात फेसएप्प के “प्राइवेसी पॉलिसी” के नोट्स को पढ़ के उठाया गया है.

इसमें पहला दावा ‘नाम है’  जो कि गलत पाया गया क्योंकि अधिकतर लोग इसमें लॉग इन नहीं कर रहे हैं बल्कि सिर्फ इसे यूज कर रहे हैं तो नाम कैसे होगा? दूसरा दावा कि यहां लाखों लोगों की तस्वीरें जमा की गई हैं, इसको मैंने जांचने की कोशिश की. इसके लिए एक नया वर्चुअल एंड्राइड इंस्टैंस बनाया और इसमें 87 रैंडम चेहरे वाली फोटो डाली. इस एंड्राइड से जो भी रिक्वेस्ट सर्वर पर जा रही है और सर्वर से वापस आ रही है को ट्रैक किया. फिर फेसएप्प इनस्टॉल किया और उसे ओपन करके एक फोटो डाला. अभी कुछ देर में कुल 50 के आस पास रिक्वेस्ट सर्वर पर की गयी पर यह जान के आश्चर्य होगा कि यह कि अधिकतर डाटा फेसबुक के सर्वर पर जा रहा है और कुल 3 ही रिक्वेस्ट फेसएप्प पर गया है. फेसबुक पर क्यूँ जा रहा है डाटा जबकि फेसबुक इनस्टॉल भी नहीं है जो जब जाने की कोशिश की तो एक आर्टिकल मिला जो कि यह दावा कर रहा है कि बड़ी एप्लिकेशन जिन्हें फेसबुक से integrate किया गया है उस से फेसबुक रैंडम बिना बताये डाटा लेता रहता है.

पर इस टेस्ट में एक बात साफ़ हो गईं कि फेसएप्प आपकी पूरी गैलरी को अपने सर्वर पर नहीं भेज रहा है जो कि अफवाहों में सबसे ऊपर है. फेसएप्प वही फोटो सर्वर पर भेज रहा है जिस फोटो का बुढ़ापा आप देखना चाहते हैं. फेसएप्प ने इस कंट्रोवर्सी के बाद एक बयान जारी करके बताया है कि डाटा क्लाउड पर स्टोर हो रहा है न कि रूसी सर्वर्स पर पर इस बात को साबित नहीं किया जा सकता कि एप्प फोटोज को रुसी सर्वर पर भेज रहा है या नहीं. यह संभव है कि डाटा वो थर्ड पार्टी को दे सकता है जैसे बाकी लोग देते हैं.

वीडियो से समझें 

 

बाकी सभी भी ऐसा कर रहे हैं तो फेसएप्प पर ही बवाल क्यूँ?

डाटा लेने के मामले में फेसबुक और गूगल तक बदनाम हैं पर उस पर इतना हाइप नहीं हो रहा है जितना कि फेसएप्प पर. गूगल टाइमलाइन तो आपका हर कदम रिकॉर्ड कर रही है. फेसबुक का Cambridge Analytica वाला मामला जगजाहिर है.  भारत में प्राइवेसी को लेकर कुछ खास जागरूकता नहीं होने के बावजूद फेसएप्प न्यूज बना रही है.

क्या है इस हाइप की वजह:

यह टेक्नोलॉजी वार और पूर्वाग्रह का परिणाम है. रूस के प्रति अमेरिका का प्रेम जगजाहिर है. आप देखेंगे की लगभग हर आर्टिकल में रूस का एप्लिकेशन बताये जाने की होड़ है, जाहिर है कोई अमेरिकन नीति में यह बुरा होगा. जैसे अमेरिकी सैकड़ों सिनेमा के जरिये यह साबित करते रहते हैं. यह अमेरिकन पूर्वाग्रह है जो अमेरिका से होते हुए भारत के आलेखों में दिख रहे हैं.

यह अमेरिका और रूस की प्रॉब्लम है जो एक-दूसरे की सफलता से जलते रहे हैं पर इस पूर्वाग्रह में हमें क्यूँ पड़ना है? 

प्राइवेसी को लेकर हम चिंतित हैं तो हमें तत्काल फेसबुक और गूगल की सेवाएं लेनी बंद करनी चाहिए क्यूंकि ये हमसे जाने-अनजाने में faceapp से सैकड़ों गुना ज्यादा डाटा ले रहे हैं. और कितने विश्वसनीय हैं उसे Cambridge Analytica वाले मामले से समझ लीजिये.

रूस और अमेरिका की प्रतिस्पर्धा दोनों का निजी मामला है. हमें सिर्फ इस बात से दुराग्रह में नहीं आना चाहिए कि फलाना एप्लिकेशन रूसी है तो बुरी होगी और अमेरिकन है तो कोई खतरा नहीं है.

यह आलेख अजयेन्द्र ने लिखा है और वह तकनीकी क्षेत्र से जुड़े हैं.