पाब्लो नेरुदा : वह न होते तो कौन अपनी प्रेमिका के लिए सदी की सबसे उदास पंक्तियाँ लिखता?जरा हट के

पाब्लो नेरुदा : वह न होते तो कौन अपनी प्रेमिका के लिए सदी की सबसे उदास पंक्तियाँ लिखता?

बैनेड्रिल का हैंगओवर कहाँ किसी शराब के हैंगओवर से कम होता है. आधी नींद में आँख खुली तो फेसबुक अपना…

कि जिनकी वजह से दुनिया जरा सी और खूबसूरत हो जाती है …खेती-बाड़ी

कि जिनकी वजह से दुनिया जरा सी और खूबसूरत हो जाती है …

बिहार प्रांत का एक जिला है चंपारण. राजनीतिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक रूप से समृद्ध चंपारण. जहां कभी गांधी ने सत्याग्रह…

…और इस तरह ‘देवदास’ के लेखक शरतचन्द्र चट्टोपाध्याय ने शराब छोड़ दी!जरा हट के

…और इस तरह ‘देवदास’ के लेखक शरतचन्द्र चट्टोपाध्याय ने शराब छोड़ दी!

लेखक शरतचन्द्र चट्टोपाध्याय के जीवन पर एक किताब है ‘आवारा मसीहा’. इस किताब को लिखने वाले हैं विष्णु प्रभाकर. किसी…

‘आज भी पुराने लोग मिथिला कला को ‘लिखिया’ कहते हैं, पेंटिंग नहीं’Uncategorized

‘आज भी पुराने लोग मिथिला कला को ‘लिखिया’ कहते हैं, पेंटिंग नहीं’

पिछले दिनों राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने मिथिला कला की वयोवृद्ध एवं सिद्धहस्त कलाकार गोदावरी दत्त को पद्मश्री से सम्मानित किया.…

कम्प्यूटर शिक्षकों को ऑफलाइन कर बिहार को कैसे ऑनलाइन करेंगे नीतीश जी?खबरें

कम्प्यूटर शिक्षकों को ऑफलाइन कर बिहार को कैसे ऑनलाइन करेंगे नीतीश जी?

बिहार प्रदेश के कम्प्यूटर शिक्षक बीते 549+ दिनों से धरने पर हैं. सरकार ने 5 सितंबर 2017 से उनकी नौकरी…

हाउ इज द जोश? दरअसल, सर/मैडम- मेरा एक सवाल हैजरा हट के

हाउ इज द जोश? दरअसल, सर/मैडम- मेरा एक सवाल है

कन्फ्यूजन ही कन्फ्यूजन है, सॉल्यूशन कुछ पता नहीं…. डायलॉग, कैमरा, एक्शन. चारों तरफ मंच सज चुके हैं. रोज कुछ न…

‘मोहब्बत के लिए तेरे भाई ने परेड छोड़ दी थी’जरा हट के

‘मोहब्बत के लिए तेरे भाई ने परेड छोड़ दी थी’

हम दोनों एक ही स्कूल में बचपन से पढ़ते थे. उस स्कूल में मेरा एडमिशन पहला था. रोल नंबर-1… कई…

दिसंबर: सब कुछ होकर भी सब होना बचा रहेगा…जरा हट के

दिसंबर: सब कुछ होकर भी सब होना बचा रहेगा…

दिसंबर खत्म हो गया एक बार फिर. वैसे तो सब कुछ खत्म ही हो जाना है. यह तय है.  लेकिन…

Reporter’s Diary: कही-सुनी नहीं अंखियन देखी…खबरें

Reporter’s Diary: कही-सुनी नहीं अंखियन देखी…

मध्य प्रदेश चुनाव कवर करते-करते जरा सी ऊब और थकान चढ़ गई थी. देह पर नहीं, जेहन पर. आदमी सोचता…

दिल्ली के दिल में ऐसा बहरूपिया नहीं देखा होगा आपने…जरा हट के

दिल्ली के दिल में ऐसा बहरूपिया नहीं देखा होगा आपने…

दिल्ली के इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (IGNCA) 5 से 7 अक्टूबर तक तीन दिवसीय ‘राष्ट्रीय बहुरुपिया उत्सव’ चल रहा…