ग्राउंड रिपोर्ट: पटना जंक्शन टू पंडित दीन दयाल उपाध्याय जंक्शन वाया बिहिया…

ग्राउंड रिपोर्ट: पटना जंक्शन टू पंडित दीन दयाल उपाध्याय जंक्शन वाया बिहिया…

पटना के मुख्य रेलवे स्टेशन पटना जंक्शन से महज 71 किलोमीटर पर है  बिहिया. पटना और कभी मुगलसराय रेलवे स्टेशन के नाम से बदला हुआ नाम पंडित दीन दयाल उपाध्याय जंक्शन के बीच में हैं बिहिया. आरा से ठीक 22 किलोमीटर पर है बिहिया. पटना से सीधे देखें तो 71 किलोमीटर और पंडित दीन दयाल उपाध्याय जंक्शन से 141 किलोमीटर पर है बिहिया. पैसेंजर और किन्हीं एक्सप्रेस ट्रेनों का स्टॉपेज  बिहिया. आरा जिले का एक ब्लॉक और थाना. उसी नाम से है बिहिया स्टेशन. आरा को जो न जानते हों उनके लिए बता दें कि आरा को दुनिया ‘वीर कुंवर सिंह’ के नाम से जानती रही है. सन् 57 की क्रांति में 80 के आसपास की उम्र होने के बावजूद अंग्रेजों के दांत खट्टे कर देने वाले कुंवर सिंह का आरा.

आरा जिला घर बा, तs कवन बात के डर बाs वाला आरा, लेकिन इस बीच आरा या कहें कि बिहिया फिर से सुर्खियों में है. वजह अच्छी तो नहीं ही कही जा सकती. आरा का बिहिया बाजार एक लड़के की हत्या, हत्या की खबर सुनकर पछाड़ खाकर गिरने वाली उसकी बहन की मौत और लड़के की हत्या के लिए उग्र भीड़ द्वारा बिना किसी जांच-पड़ताल और सबूत के जिम्मेदार मान ली गई थियेटर, डांसर और कथित तौर पर देहधंधे में शामिल महिला के घर पर हुई तोड़फोड़, आगजनी और फिर उस महिला को मारते-पीटते हुए सरेबाजार नंगा करके घुमाए जाने को लेकर सुर्खियों में है.

बिहिया रेलवे स्टेशन व प्लेटफॉर्म से बमुश्किल 50 मीटर की दूरी पर ही वो स्पॉट है जो सारे फसाद की जड़ है. जहां पहले एक लड़के की डेड बॉडी मिली. जीआरपी और जिला प्रशासन द्वारा जिम्मेदारी न लेने की वजह से बॉडी वहां घंटों पड़ी रही. लोग जुटते रहे. जिला प्रशासन की लापरवाही और त्वरित कार्रवाई न करने की वजह से वहां जुटे लोग शासन-प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी, पत्थरबाजी और आगजनी करने लगे. नजदीक के ही रेलवे ट्रैक पर बिछे पत्थरों ने उग्र हो रही भीड़ का काम और भी आसान कर दिया.

रेलवे ट्रैक जहां से लोगों ने पत्थरबाजी की और दीवार से सटी जगह जिसपर समूचा विवाद खड़ा हुआ

जब हमारी टीम ने बिहिया थाने के तात्कालिक प्रभारी थानेदार धनंजय कुमार से बातचीत की तो उन्होंने कहा कि पुलिस अपना काम कर रही है. जब हमने बिहार के नामी अखबार में छपी रपट का उन्हें हवाला दिया तो उन्होंने बात कहीं और मोड़ दी. वे कहने लगे कि स्पॉट के पास की ही दीवार ने पुलिसकर्मियों को बचा लिया. एक तरफ 10 की संख्या में पुलिसकर्मी थे वहीं दूसरी तरफ सैकड़ों की संख्या में उग्र भीड़. हालांकि, वहां मौजूद चश्मदीदों का कहना है कि इस पूरे क्रम के लंबा खिंचने और बवाल के इतना बड़े हो जाने के पीछे स्थानीय थाना कहीं अधिक जिम्मेदार है. लोग सहमे हुए हैं. आमतौर पर रात के दस बजे तक चलने वाला बाजार आठ बजते-बजते ही शांत हो जा रहा है.

भले जान से मार देता लेकिन लंगा करके घुमाना ठीक नहीं था
रेलवे ट्रैक के इस पार और उस पार में कोई 50 मीटर का फासला है. हमने जब उस पार पत्थर का कारोबार कर रहे मंटू ओझा कहते हैं यहां का इतिहास ही यही है. यहां रोज छिनतई होता है. दारूबंदी के बावजूद दारू बिकता है. उन्हीं घरों के जेन्ट्स और लड़के इन्हीं धंधों में संलिप्त हैं. वे कहते हैं कि साल भर पहले एसपी ने कड़ाई की थी और ये पूरा धंधा छह महीने तक बंद था. फिर शुरू हो गया. ऐसा नहीं है कि कोई इस बात को नहीं जानता कि वहां क्या हुआ? सभी जानते हैं लेकिन किसी के बोलने का कोई असर नहीं है. वे जोर देकर कहते हैं कि ऐसा होना नहीं चाहिए था. भले ही जान से मार देता लेकिन ‘लंगा (नंगा)’ करके नहीं घुमाना चाहिए था. जब हमने वहीं मौजूद एक और व्यक्ति से इस पूरे मामले में एक राजद के स्थानीय नेता के बारे में पूछा तो वे कहने लगे कि हमें तो नहीं मालूम कि वो कितना पड़ा राजद का नेता है. मीडिया स्कैंडल बना रहा है. उड़ा रहा है. पार्टियां दलित और महादलित का कार्ड खेल रही हैं. हमारी उनसे बात हो ही रही थी कि हमें थाने की पुलिस वहां आती दिखी. जब हम वहां नजदीक पहुंचे तो पाया कि फोरेंसिक टीम वहां पहुंची थी. थाने की पुलिस उन्हें ब्रीफ कर रही थी.

मामले की जांच करने मौके पर पहुंची फोरेंसिक टीम

बुद्धिजीवियों में रोष, आमजन को कोई फर्क नहीं
चूंकि इस घटना का वीडियो बना और फिर व्हाट्सएप और सोशल मीडिया के माध्यम से पूरी दुनिया में फैल गया. तो इस मामले में कल मौके पर मौजूद और इस पूरे मामले को नजदीक से देखने वाले नेटवर्क 18 के पत्रकार हिमांशु से जब हमने पूछा कि क्या स्थानीय लोग इस पूरे मामले को लेकर रोष में हैं? तो उन्होंने कहा कि सिर्फ जिला के बुद्धिजीवियों को परेशानी है कि जिले का नाम बदनाम हो रहा है, बाकी आम जनता को कोई मतलब नहीं है. सभी जानते हैं कि यहां क्या होता है. हम जब पटना से बिहिया के लिए ट्रेन से आ रहे थे तो एक स्थानीय बुजुर्ग से बात होने लगी. वे कहने लगे कि बिहिया की ‘रंडियों’ ने न जाने ऐसे कितने कांड किए हैं. लोगों से पैसे छीनना और उन्हें मार देना. ऐसा वो बहुत समय से करती रही हैं. इस बार मामला दिन में हुआ (12 बजे दिन) और वो सब धरा गईं. जब धरा गईं तो मामला उजागर हो
गया.

आगजनी का शिकार थियेटर, घर और घर के बाहर जली हुई एक मोटरसाइकिल

क्या पुलिस ने निर्दोषों को भी पकड़ लिया है?
द बिहार मेल की टीम स्पॉट के आसपास पांच से छह घंटे तक रही. बड़ी मुश्किल से कुछ लोग बात करने के लिए तैयार हुए. पुलिस ने अब तक कुल 15 लोगों को पकड़ा है. पुलिस ने बिहिया बाजार से कई लड़कों और नौजवानों को पकड़ लिया है. इनमें से कई नाबालिग भी हैं. पुलिस का कहना है कि उन्होंने वीडियो फुटेज के आधार पर उन्हें पकड़ा है और आरोपियों के परिजनों का कहना है कि बाजार में होने की वजह से उनके बच्चों की तस्वीर कहीं से खिंच गई या वीडियो में वे दिख गए और पुलिस उनके बच्चों को पकड़ कर ले गई. इस पूरे मामले में अधिकांश लोग बाहरी थे. बाजार के लोगों का इस पूरे मामले से कोई लेना-देना नहीं. एक आरोपी बच्चे के परिजन ने हमें बताया कि भीड़ उस महिला डांसर को मारती-पीटती हुई उनके दरवाजे तक पहुंच गई. वे लोहे के ग्रिल और खिड़की बनाने का काम करते हैं. भीड़ के भेड़ियाधसान ने उनके दरवाजे को भी तोड़ दिया.

आगजनी का शिकार महिला डांसर का घर. सब कुछ हुआ राख

उनका कहना है कि उन्होंने भीड़ से रिक्वेस्ट किया कि महिला को उनके दरवाजे पर न पीटा जाए. ये पाप उनके सिर न आए. भीड़ ने उनकी बात मान ली. चूंकि ये मोहल्ले की बात है और उनके परिवार का लड़का मोहल्ले का मेधावी लड़का है. हाल ही में उसने आरा के महाराजा कॉलेज में एडमिशन लिया है. 10वीं और 12वीं में वह अच्छे नंबरों से पास हुआ है. वो तो वहां था भी नहीं जब उनके घर के बाहर ये सबकुछ चल रहा है. वे इस बात का अंदेशा जताते हैं कि जब उस महिला ने पुलिस से पूरे क्रम को बताया हो तो उनका और उनके लड़के शुभम का जिक्र किया हो और देर रात पुलिस उनके लड़के को भी घर से उठाकर ले गई. बाजार में ही आलू बेचने वाले एक शख्स के दो लड़कों को पुलिस पकड़ कर ले गई है. जिनमें से एक नाबालिग भी है.

इस पूरी रिपोर्ट को लिखने का आशय यह है कि इस पूरी कहानी में कई परतें हैं. लड़के की हत्या, हत्या के बाद उसकी बॉडी को लेकर जीआरपी और बिहार पुलिस की आपसी खींचतान और बॉडी को वहां से देर से उठाना, लड़के की हत्या के बाद स्थानीय लोग और भीड़ का गुस्सा, महिला डांसर के घर और आसपास लगाई गई आग, महिला को मारते-पीटते निर्वस्त्र करके बाजार में घुमाना, देर रात पुलिस का बाजार से कई लड़कों को उनके घर से जबरी उठा लिया जाना. इसके अलावा भी कई परतें हैं. हमारी टीम ने ऐसी कोशिश की है कि हम अपने पाठकों तक कहानी के दूसरे एंगल भी लेकर आएं. अभी के लिए बस इतना ही….